सिद्धार्थनगर : सकल हिंदू समाज समिति द्वारा बढ़नी क्षेत्र के भरौली स्थित विश्व हिंदू परिषद के प्रांगण में विराट हिंदू सम्मेलन का आयोजन किया गया। वक्ताओं ने राष्ट्र निर्माण में मातृशक्ति की भूमिका और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के संकल्पों पर विशेष जोर दिया। इसके अलावा वक्ताओं ने हिंदू समाज की एकता, सांस्कृतिक मूल्यों के संरक्षण, सामाजिक समरसता, कुटुंब प्रबोधन, पर्यावरण, नागरिक शिष्टाचार, स्वदेशी और राष्ट्र निर्माण में समाज की भूमिका पर जोर दिया। उन्होंने ऐसे आयोजनों को समाज को जोड़ने और आपसी मतभेदों को समाप्त करने में महत्वपूर्ण बताया।

विराट हिंदू सम्मेलन को संबोधित करते हुए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ सिद्धार्थनगर के जिला प्रचारक विशाल ने कहा कि हिंदू जागरण का अर्थ केवल मंदिरों की रक्षा या उत्सव मनाना नहीं है। यह राष्ट्र-निर्माण का कार्य है। यह समाज में सद्भाव लाने का कार्य है। यह हर हिंदू को स्वाभिमानी, संगठित और सेवा-तत्पर बनाने का कार्य है। आज का समय बहुत महत्वपूर्ण है। दुनिया बदल रही है। चुनौतियाँ बढ़ रही हैं। लेकिन हमारी शक्ति भी बढ़ रही है। जब हिंदू जागृत होता है, तो पूरा विश्व उसकी ओर देखता है। सनातन की शक्ति मजबूत होगी, तो सनातन का भाव मजबूत होगा।

आरएसएस, बढ़नी खंड कार्यवाह डॉ. राज नरायन उपाध्याय ने कहा कि यह सम्मेलन केवल हमारी एकता का प्रदर्शन नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए संगठित, जागृत और समरस हिंदू समाज की नींव रखने का संकल्प है। आज समाज में हमें जाति, भाषा, संप्रदाय, क्षेत्र, संपत्ति आदि कई प्रकार के भेद दिखाई देते हैं, लेकिन सच्चाई यह है कि हम सब एक ही वृक्ष के पत्ते हैं। जड़ एक है सनातन धर्म। शाखाएँ अलग-अलग दिखती हैं, पर पोषण एक ही मिट्टी से होता है।

प्रसिद्ध कवि डॉ. विनयकांत मिश्र एवं कवयित्री डॉ. सीमा मिश्र ने अपने काव्यपाठ के माध्यम से सनातन धर्मावलंबियों को संगठित करने पर बल दिया। इससे पहले सुंदरकांड का पाठ किया गया और अंत में भारत माता की आरती के बाद कार्यक्रम का समापन हुआ। अध्यक्षता सत्य प्रकाश धर दूबे ने तथा संचालन जुग्गीराम राही ने किया।

इस दौरान युवा भाजपा नेता व ब्लॉक प्रमुख प्रतिनिधि सिद्धार्थ चौधरी, हियुवा के पूर्व जिला उपाध्यक्ष भानु प्रताप सिंह, भाजपा जिला उपाध्यक्ष विनीत कमलापुरी, राम पाठक, अजय प्रताप यादव, शिवाजी मिश्र, बेचन यादव, अभिषेक श्रीवास्तव, अमित मिश्रा, शैलेंद्र अग्रहरि, तुलसीराम, रमेश मौर्या, रामू यादव आदि उपस्थित रहे।






