नई दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट की एडवोकेट, कई गौशालाओं की संचालिका एवं गाय को राष्ट्र जननी घोषित करने के लिए आंदोलन चलाने वाली सामाजिक कार्यकर्ता रीना एन सिंह ने कहा कि
देश के उन सभी राज्यों में जहाँ गोहत्या पूर्णतः प्रतिबंधित है, अगर किसी नागरिक को लगता है की वहाँ खुलेआम गोहत्या हो रही है तो यह कानून का उल्लंघन है। यह अत्यंत आश्चर्यजनक और चिंताजनक है कि जिन क्षेत्रों में इस प्रकार की गैरकानूनी गतिविधियाँ चल रही हैं, वहाँ के तथाकथित जागरूक नागरिक, सामाजिक कार्यकर्ता और स्वयंभू भगवान आखिरकार चुप क्यों बैठे हैं ? यदि किसी गांव, कस्बे या जिले में गोहत्या हो रही है, तो वहाँ के स्थानीय लोग, विशेषकर जो स्वयं को धर्म और समाज का रक्षक बताते हैं, उनका यह कानूनी और नैतिक दायित्व बनता है कि वे तत्काल संबंधित थाने में आपराधिक शिकायत दर्ज कराएं। लेकिन दुर्भाग्यवश, यह देखा जा रहा है कि लोग जानबूझकर केवल सोशल मीडिया पर बयानबाजी तक सीमित रहते हैं।
यह स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि या तो उनमें कानून के प्रति गंभीरता की कमी है, या फिर वे जानबूझकर ऐसी गतिविधियों को संरक्षण दे रहे हैं। केवल आरोप लगाना या भावनात्मक बयान देना पर्याप्त नहीं है, यदि वास्तव में गोहत्या हो रही है, तो उसके खिलाफ ठोस कानूनी कार्रवाई करना ही सच्ची जिम्मेदारी है। अतः सभी नागरिकों, विशेषकर स्वयं को आम जन से श्रेष्ठ समझने वाले ईश्वर के प्रतिनिधि कहने वालों से अपेक्षा है कि वे केवल शोर मचाने के बजाय संबंधित साक्ष्यों के साथ तत्काल एफआईआर दर्ज कराएं और दोषियों को कानून के दायरे में लाने में सहयोग करें। अन्यथा, उनकी चुप्पी और निष्क्रियता भी इस अपराध में अप्रत्यक्ष सहभागिता मानी जाएगी।
रीना एन सिंह ने कहा कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सरकार बनने के बाद से ही गौ हत्या पर तत्काल प्रतिबंध लगाया और कठोर कानून बनाया उसके बावजूद भी यदि कहीं पर कोई घटना हो रही है तो कार्यवाही भी हो रही है फिर भी यदि कार्यवाही नहीं होती तो है उसके लिए प्रशासन पर दबाव बनाया जाना चाहिए। लेकिन धर्म और गाय राजनीति का विषय नहीं होना चाहिए।




