सिद्धार्थनगर : बढ़नी कस्बे के दयानंद एवं आर्य कन्या विद्यालय के सभागार में अपनी अधिवर्षता आयु पूर्ण कर सेवानिवृत्त हो चुके शिक्षकों को विद्यालय के व्यवस्था प्रभारी बीपी त्रिपाठी ने मल्यार्पण कर उन्हें अंगवस्त्र व महर्षि स्वामी दयानंद सरस्वती की विश्व प्रसिद्ध कृति ‘सत्यार्थ प्रकाश’ भेंट कर सम्मानित करते हुए उनके उज्जवल भविष्य कामना की।
कार्यक्रम को बतौर मुख्यातिथि संबोधित करते हुए विद्यालय के व्यवस्था प्रभारी बीपी त्रिपाठी ने सेवानिवृत्त हो चुके सभी शिक्षकों की सराहना करते हुए कहा कि सेवानिवृत्त होना एक शाश्वत प्रक्रिया है। जिससे एक दिन किसी भी विभाग में कार्य करने वाले को गुजरना पड़ता है। कहा कि हमारे सभी शिक्षकों का इस विद्यालय को संवारने में अतुलनीय योगदान है, जिसकी मैं व्याख्या नहीं कर सकता। कहा कि शिक्षक एक मोमबत्ती के समान होता है जो स्वयं जलकर दूसरों को प्रकाशित करता है, अध्यापक कभी सेवानिवृत्त नहीं होता, वह एक राष्ट्र निर्माता के रूप में सदैव सभी का मार्गदर्शन करता रहता है और वह सदैव स्वस्थ समाज के निर्माण में प्रयत्नशील रहता है।
सेवानिवृत्त हो चुके शिक्षक जुग्गीराम राही ने कहा कि इस विद्यालय के हजारों बगिया के नन्हें मुन्हें फूलों को हम सभी ने संवारा है, जो आज समाज के हरेक क्षेत्र में अपनी सेवा दे रहे हैं। कहा कि जिस प्रकार हम लोगों ने अपने सेवाकाल में विद्यालय के प्रतिष्ठा को राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाया है उसी तरह शिक्षण कार्य कर रहे अध्यापकों से उससे भी लंबी रेखा खींच कर विद्यालय की गरिमा बढ़ाने की अपील की।
सेवानिवृत्त शिक्षक अतुल शुक्ला, रेणुका श्रीवास्तव, प्रभु दयाल, वीरेंद्र पांडेय तथा लवहर राम ने भी अपने संबोधन में उपस्थित शिक्षकों से बेहतर कार्य करते रहने की अपील की। कार्यक्रम का संचालन अरविंद झा ने किया।
विद्यालय के वरिष्ठ शिक्षक विनोद द्विवेदी, शीला पांडेय आदि ने भी कार्यक्रम को सम्बोधित किया।
इस दौरान प्रधानाध्यापक शिव प्रकाश निगम, वेद प्रकाश शुक्ला, दीपक अग्रहरि, रीता शाही, रामरूप पांडेय, जनार्दन प्रजापति, सुधीर पाठक, शिवानी मोदनवाल, सुनील त्रिपाठी, शुभम गुप्ता, प्रज्ञा यादव, अर्चना यादव अर्पणा वर्मा, फ़िज़ा ख़ान, अर्शिया ख़ान आदि मौजूद रहे।




