‘हाड़ा’ विकास सिंह
काठमांडू : नेपाल की राजधानी काठमांडू और धादिङ को जोड़ने वाला देश का पहला आधुनिक नागढुंगा-सिस्नेखोला सुरंग मार्ग सोमवार को औपचारिक रूप से राष्ट्र को समर्पित कर दिया गया। लगभग सात वर्ष पहले शुरू हुई इस बहुप्रतीक्षित परियोजना का उद्घाटन भौतिक अवसंरचना एवं परिवहन विकास मंत्री सुनील लम्साल ने जापान के राजदूत मायदा तोरु तथा जापान अंतरराष्ट्रीय सहयोग एजेंसी (जाइका) के अध्यक्ष डॉ. तनाका अकिहिको की उपस्थिति में किया।

परियोजना के उपनिदेशक संजय पन्थी ने बताया कि सुरंग मार्ग को फिलहाल आम वाहनों के लिए पूरी तरह नहीं खोला जाएगा। शुरुआती चरण में केवल एंबुलेंस, दमकल, सुरक्षा एजेंसियों के वाहन तथा अन्य अत्यावश्यक सेवाओं से जुड़े वाहनों को ही इस मार्ग से गुजरने की अनुमति होगी। अगले तीन महीनों तक ट्रायल ऑपरेशन चलाया जाएगा, जिसके दौरान सुरक्षा व्यवस्था, यातायात प्रबंधन और तकनीकी प्रणालियों का परीक्षण किया जाएगा। परीक्षण सफल रहने के बाद अन्य वाहनों के लिए भी इसे चरणबद्ध तरीके से खोला जाएगा।

परीक्षण अवधि में नहीं लिया जाएगा टोल
परियोजना प्रबंधन के अनुसार, तीन महीने की परीक्षण अवधि के दौरान सुरंग मार्ग से गुजरने वाले वाहनों से कोई टोल शुल्क नहीं लिया जाएगा। नियमित संचालन शुरू होने के बाद वाहन श्रेणी के अनुसार शुल्क लागू होगा।

निर्धारित टोल दरें इस प्रकार हैं-
• कार एवं वैन : काठमांडू प्रवेश पर 65 नेपाली रुपये, निकास पर 60 नेपाली रुपये।
• मिनी बस, ट्रक एवं टिपर : प्रवेश पर 115 नेपाली रुपये, निकास पर 80 नेपाली रुपये।
• बस एवं बड़े ट्रक : प्रवेश पर 260 नेपाली रुपये तथा निकास पर 200 नेपाली रुपये।
नेपाल सरकार की मंत्रिपरिषद पहले ही वाहन श्रेणी के अनुसार 60 से 600 नेपाली रुपये तक का टोल शुल्क स्वीकृत कर चुकी है।

इन वाहनों के प्रवेश पर रहेगा प्रतिबंध
सुरक्षा मानकों को ध्यान में रखते हुए सुरंग मार्ग में पैदल यात्रियों, मोटरसाइकिल, स्कूटर, तीन पहिया वाहनों तथा डीजल, पेट्रोल, गैस सहित ज्वलनशील एवं विस्फोटक पदार्थ ले जाने वाले वाहनों के प्रवेश पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा।

नेपाल के बुनियादी ढांचे में ऐतिहासिक उपलब्धि
करीब 80 महीनों के निर्माण कार्य के बाद तैयार हुआ यह सुरंग मार्ग नेपाल की आधारभूत संरचना के विकास में एक ऐतिहासिक उपलब्धि माना जा रहा है। सुरंग काठमांडू के चन्द्रागिरि नगरपालिका-1, दहचोक टोटीपाखा से शुरू होकर धादिङ जिले की धुनीबेँसी नगरपालिका स्थित सिस्नेखोला तक जाती है। इसके शुरू होने से नागढुंगा सड़क खंड पर वर्षों से लगने वाले जाम, खड़ी चढ़ाई और घुमावदार रास्तों से राहत मिलने की उम्मीद है। साथ ही यात्रियों का लगभग एक घंटे तक का यात्रा समय भी बचेगा, जिससे राजधानी और पश्चिमी नेपाल के बीच आवागमन अधिक सुरक्षित, तेज और सुगम होगा।

जापान और नेपाल के संयुक्त सहयोग से बनी परियोजना
लगभग 25 अरब नेपाली रुपये की लागत से निर्मित इस महत्वाकांक्षी परियोजना को जापान सरकार के रियायती ऋण और नेपाल सरकार के संयुक्त निवेश से पूरा किया गया है। इसमें निर्माण कार्य पर लगभग 17 अरब नेपाली रुपये, विनिमय दर एवं निर्माण सामग्री की लागत बढ़ने के कारण अतिरिक्त 2 अरब नेपाली रुपये तथा भूमि अधिग्रहण एवं मुआवजे पर करीब 6 अरब नेपाली रुपये खर्च किए गए। परियोजना के लिए कुल 480 रोपनी भूमि का अधिग्रहण किया गया।

परियोजना को मूल रूप से 42 महीनों में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन कोविड-19 महामारी, तकनीकी चुनौतियों और अन्य कारणों से निर्माण कार्य में देरी हुई और अंततः लगभग 80 महीनों बाद यह परियोजना पूरी हो सकी। यह सुरंग मार्ग नेपाल के परिवहन इतिहास में एक नए युग की शुरुआत माना जा रहा है और भविष्य में देश के आधुनिक सड़क नेटवर्क के विस्तार की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगा।

Author: Vikas News
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