सिद्धार्थनगर : पड़ोसी राष्ट्र नेपाल के सीमावर्ती कृष्णनगर स्थित लक्ष्मी नारायण मंदिर परिसर में आयोजित 12 दिवसीय श्रीराम कथा के दूसरे दिन अंतर्राष्ट्रीय कथावाचक अतुल कृष्ण भारद्वाज ने सती परीक्षा, सती दहन व शिव विवाह का विस्तार से वर्णन किया। उन्होंने बताया कि श्रीराम कथा का वास्तविक प्रारंभ सती प्रसंग से ही होता है, जो श्रोताओं के लिए विशेष महत्व रखता है।

अंतर्राष्ट्रीय कथावाचक अतुल कृष्ण भारद्वाज ने कहा कि जब भगवान शिव ने सांसारिक कथा सुनाई थी, तब वे घोर तपस्या में लीन होकर उसे सुन रहे थे। इसके विपरीत, सती पूरे ध्यान से कथा नहीं सुन सकीं, जिसके कारण उनके मन में भ्रम की स्थिति बनी रही। शिव शंकर इस ज्ञान के पूर्ण ज्ञाता हो गए थे।
उन्होंने कहा कि एक बार शिव शंकर सती के साथ जंगल में भ्रमण कर रहे थे। रास्ते में उन्हें भगवान श्रीराम मिले, जो माता सीता के हरण के बाद विलाप कर रहे थे और उन्हें वन में ढूंढ रहे थे। शिव शंकर ने श्रीराम को तुरंत पहचान लिया और हाथ जोड़कर खड़े हो गए। सती श्रीराम को नहीं पहचान पाईं और शिव शंकर से प्रश्न किया कि वे एक साधारण मानव के सामने क्यों हाथ जोड़कर खड़े हैं। शिव शंकर ने उत्तर दिया कि वे साधारण मानव नहीं, बल्कि उनके आराध्य भगवान हैं। सती ने इस पर संदेह व्यक्त करते हुए कहा कि यदि वे भगवान होते तो उन्हें रोने की आवश्यकता नहीं पड़ती और वे स्वयं सीता को खोज लेते।

शिव शंकर ने सती से कहा कि वे स्वयं श्रीराम को परख कर देख लें। जब श्रीराम आगे निकल गए, तो सती ने माता सीता का रूप धारण कर लिया और श्रीराम के सामने प्रकट हुईं। श्रीराम ने उन्हें तुरंत पहचान लिया, जिससे सती को अपनी गलती का एहसास हुआ और उन्हें श्रीराम के वास्तविक स्वरूप का ज्ञान हुआ।उन्होंने कहा कि राम वन गए, इसलिए वे बन गए।

उन्होंने कहा कि पिता के घर, गुरु के घर, मित्र के घर और स्वामी/प्रभु के घर में बिना बुलाए ही जाना चाहिए। ये ऐसे स्थान हैं जहाँ जाने के लिए संकोच नहीं करना चाहिए और निमंत्रण की आवश्यकता नहीं होती, क्योंकि यहाँ आदर और प्रेम प्राप्त होता है।
उन्होंने भावपूर्ण भजन ‘जैसा मेरा भोला, भोला भाला, वैसा कोई भी भोला नहीं है’, मुंड माला गले में पड़ी है, कोई हीरो की माला नहीं है’।
कथा के दौरान महात्मा लाटूर सिंह के सन्यास लेने का प्रसंग भी सुनाया, जिसे सुनकर श्रद्धालु भावुक हो उठे। इसके साथ ही भगवान शिव और माता पार्वती के दिव्य विवाह का भी सुंदर वर्णन किया।

इस दौरान आरएसएस के विभाग प्रचारक राजीव नयन, जिला संघ चालक गोकुल गोयल, राजन उपाध्याय, सरदार रविंद्र सिंह, गुलाब अग्रवाल, रामेश्वर प्रसाद आचार्य, विजय कानोड़िया, ‘हाड़ा’ विकास सिंह, मनोज कानोड़िया, प्रमोद पाठक, पवन अग्रवाल, नंद किशोर शर्मा, मुकुल शर्मा, नंद किशोर कमलापुरी आदि मौजूद रहे।




