• राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ शोहरतगढ़ नगर की ओर से आयोजित था पथ संचलन कार्यक्रम
• कार्यक्रम शुरू होने के चंद घंटे पहले एसडीएम ने बदला मार्ग
सिद्धार्थनगर : राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ (आरएसएस) शोहरतगढ़ नगर की ओर से नौ अक्टूबर को शताब्दी वर्ष के मौके पर कस्बे में पथ संचलन कार्यक्रम आयोजित किया गया था। इस कार्यक्रम को लेकर सुबह से तैयारी चल रही थी, लेकिन चंद घंटे पहले तहसील प्रशासन ने 11 दिन पहले यानि 29 सितंबर को दिए आदेश में बदलाव कर दिया। संचलन मार्ग में बदलाव की जानकारी होते ही स्वयंसेवक आक्रोशित हो उठे। सभी पूर्व से तय मार्ग पर चलने पर अड़े रहे, लेकिन प्रशासन से बात नहीं बन सकी। इसके चलते स्वयंसेवकों ने पथ संचलन नहीं निकाला। इसे लेकर रात आठ बजे तक कार्यक्रम स्थल पर गहमा-गहमी बनी रही।
दरअसल, संघ शताब्दी वर्ष के मौके पर दो से 15 अक्टूबर तक एकत्रीकरण/पथ संचलन कार्यक्रम आयोजित कर रहा है। यह कार्यक्रम शहर से लेकर मंडल स्तर (गांव स्तर) पर किए जा रहे हैं। नौ अक्टूबर को शोहरतगढ़ नगर टोली की ओर से कस्बे के श्रीराम जानकी मंदिर से पथ संचलन निकालने के लिए कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम को लेकर नगर टोली ने बकायदा एसडीएम शोहरतगढ़ से परमिशन लिया था। एसडीएम विवेकानंद मिश्र ने 29 सितंबर को परमिशन आदेश जारी किया था। जिसमें उन्होंने दोपहर दो बजे से कार्यक्रम प्रारंभ होने की अनुमति दी थी और संचलन श्रीराम जानकी मंदिर परिसर से प्रारंभ होकर गड़ाकुल तिराहा, वापस नगर पंचायत कार्यालय, गोल घर, कृषक मंडप तिराहे से बाएं रमजान गली होते हुए नीबी दोहनी, मुख्य सड़क मार्ग, वापस श्रीराम जानकी मंदिर में समापन करने का उल्लेख है। एसडीएम का यह आदेश होने के बाद भी नौ अक्टूबर को अचानक कार्यक्रम शुरू होने के चंद घंटे पहले एसडीएम ने दूसरा आदेश जारी कर दिया। इस आदेश में गोल घर से आगे भारत माता चौक से आगे जाने की बजाए प्रेम गली होते हुए नीबी दोहनी जाने का उल्लेख है। एसडीएम द्वारा मार्ग परिवर्तन की जानकारी होते ही स्वयंसेवक आक्रोशित हो उठे। इस दौरान संघ के उच्चाधिकारियों ने नगर व खंड टोली से चर्चा की। जिसमें सभी ने पहले से मिले परमिशन वाले मार्ग से ही संचलन निकालने की बात कही, लेकिन प्रशासन मानने को तैयार नहीं हुआ। इसे लेकर रात आठे बजे तक मंदिर परिसर में गहमा-गहमी बनी रही। कई स्वयंसेवक गिरफ्तारी देने व धरना प्रदर्शन की बात कहने लगे। स्वयंसेवक मंदिर से हटने को तैयार नहीं थे। स्वयंसेवकों का आरोप था कि प्रेम गली के पास बैरिकेटिंग कर पुलिस बल किसके इशारे पर तैनात किया गया है। ऐसा कभी नहीं हुआ था। अंत में जिला प्रचारक विशाल व जिला कार्यवाह शिवेंद्र सिंह ने सभी स्वयंसेवकों को समझा कर उक्त दिवस निकलने वाले संचलन को स्थगित किया। इसके बाद स्वयंसेवकों के साथ बैठक की और पूर्व से तय मार्ग से ही संचलन निकालने की रणनीति तैयार की। इसके बाद स्वयंसेवक घर जाने को राजी हुए। इस दौरान राजेश आर्या, पंकज श्रीवास्तव, शिवशक्ति शर्मा, रमेश कसौधन, ऋषि वर्मा, अखिलेश वर्मा, रवि अग्रवाल, मनोज गुप्ता, बब्लू गौड़, श्रवण पटवा, मनीष श्रीवास्तव आदि मौजूद रहें। उक्त मामले पर एसडीएम व सीओ का पक्ष जानने के लिए कई बार फोन लगाया गया। पूरी घंटी भी बजी, लेकिन फोन नहीं उठ सका।
दो वर्ष पहले पुराने मार्ग से ही निकला था संचलन
संघ के स्वयंसेवकों ने प्रशासन पर राजनैतिक दवाब में मार्ग बदलने का आरोप लगाया। स्वयंसेवकों ने बताया कि 22 मार्च 2023 को पूर्व से तय मार्ग कृषक मंडप से रमजान गली, मोती नेता तिराहा होते हुए संचलन निकाला गया था। इसके बाद भी प्रशासन जानबूझ कर संघ के कार्यक्रम में व्यवधान उत्पन्न किया है। प्रशासन दो वर्ष पहले के रिकार्ड चेक करने को तैयार नहीं है।
मामला सुलझाए बगैर चलते बने प्रांत प्रचारक
कस्बे में पथ संचलन शुरु होने से पहले प्रांत प्रचारक रमेश का बौद्धिक हुआ। बौद्धिक समाप्त होने के बाद स्वयंसेवकों ने मार्ग को लेकर प्रशासन द्वारा खड़ा किए गए अवरोध की जानकारी दी गई। जानकारी देने के दौरान स्वयंसेवक आक्रोशित रहे। इस दौरान प्रांत प्रचारक अभिभावक की तरह मामले को सुलझाए बगैर चलते बने। इससे खफा स्वयंसेवकों ने कहा कि कस्बे में संचलन पूर्व से तय मार्ग से नहीं निकलता तो संगठन को भरपाई करनी पड़ेगी।
एसडीएम द्वारा 29 सितंबर को जारी किया गया अनुमति पत्र
एसडीएम द्वारा 9 अक्टूबर को जारी किया गया अनुमति पत्र
एसडीएम का आदेश ही भ्रामक
शोहरतगढ़ एसडीएम का परमिशन को लेकर आदेश ही भ्रामक है। 29 सितंबर को जारी आदेश में एसडीएम ने श्रीराम जानकी मंदिर, गड़ाकुल तिराहा, वापस नगर पंचायत कार्यालय, गोलघर, कृषक मंडप चौराहा से बाएं रमजान गली होते हुए नीबी दोहनी, मुख्य मार्ग वापस मंदिर पहुंचकर समाप्त होने की अनुमति दी है। वहीं नौ अक्टूबर के आदेश में एसडीएम ने भारत माता चौक, कृषक मंडप चौराहा से बाएं प्रेमगली में जाने की अनुमति दी है, जबकि वहां प्रेम गली नहीं है। ऐसे में आदेश ही लोगों को उहापोह में डाल रखा है।
गिरफ्तारी देने पर शुरू हुई संचलन की परंपरा
संघ की स्थापना वर्ष 1925 में विजयादशमी के दिन हुई थी। विजयादशमी के इस कार्यक्रम को मनाने के लिए शोहरतगढ़ में संघ के स्वयंसेवक हर वर्ष उत्साहित रहते थे, लेकिन धारा 144 लग जाने के चलते संचलन नहीं निकल पा रहा था। वर्ष 1956 में तत्कालीन प्रचारक संकटा प्रसाद ने स्व. रघुनाथ जायसवाल (पूर्व चेयरमैन) जैसे सैकड़ों स्वयंसेवकों में इस कदर जोश भरा कि सभी धारा 144 को तोड़ते हुए गिरफ्तारी दिये। तब शोहरतगढ़ में संचलन की परंपरा चली आ रही है और यह संचलन उसी मार्ग से निकलता रहा है जिसमें प्रशासन ने बदलाव किया है।
प्रशासन की गलती की वजह से शोहरतगढ़ में संघ का संचलन नहीं निकल पाया। कस्बे में संचलन निकलेगा यह तय है। स्वयंसेवकों की ओर से तय मार्ग से ही संचलन निकलेगा। इसकी रणनीति तय हो रही है।
शिवेंद्र सिंह
जिला कार्यवाह, आरएसएस, सिद्धार्थनगर




