लखनऊ। राष्ट्रीय सहारा हिंदी दैनिक और सहारा इंडिया टावर से जुड़े कर्मचारियों ने बिना पूर्व सूचना अख़बार बंद किए जाने और बकाया वेतन, ग्रेच्युटी व पीएफ भुगतान न होने का आरोप लगाते हुए श्रम विभाग का दरवाज़ा खटखटाया है। इस संबंध में अपर श्रमायुक्त, लखनऊ क्षेत्र को औपचारिक शिकायत सौंपी गई है।
शिकायत में कहा गया है कि राष्ट्रीय सहारा वर्ष 1992 से लगातार प्रकाशित हो रहा था, लेकिन 8 जनवरी 2026 को बिना किसी पूर्व नोटिस के इसका प्रकाशन अचानक रोक दिया गया। कर्मचारियों का आरोप है कि वर्ष 2014 से नियमित वेतन वृद्धि नहीं की गई, नवंबर 2011 से कई-कई महीनों तक वेतन भुगतान लंबित रहा और इसके बावजूद कर्मचारियों से लगातार काम कराया जाता रहा।

दस्तावेज़ों के मुताबिक, कर्मचारियों को दिए जाने वाले आयकर फॉर्म-16 में वेतन भुगतान दर्शाया गया, जबकि वास्तविक रूप से भुगतान नहीं किया गया। आरोप है कि प्रबंधन की ओर से अचानक तानाशाही तरीके से अख़बार बंद करने का फैसला लिया गया, जिससे सैकड़ों कर्मचारी बेरोज़गारी की स्थिति में पहुंच गए।
मामले में अपर श्रमायुक्त कार्यालय ने संज्ञान लेते हुए 12 जनवरी 2026 को दोपहर 3 बजे सुनवाई की तिथि तय की है। इस संबंध में सहारा इंडिया मीडिया से जुड़े वरिष्ठ अधिकारियों सीईओ सुमित राय, यूनिट हेड अजीत बाजपेयी और प्रशासनिक हेड डेरिक एस गोडिन सहित संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर पेश होने के निर्देश दिए गए हैं।
कर्मचारियों का कहना है कि संस्थान पर हर कर्मचारी का लाखों रुपये का बकाया वेतन, ग्रेच्युटी और पीएफ लंबित है। साथ ही आरोप लगाया गया है कि भारत सरकार के श्रम कानूनों का भी उल्लंघन किया गया है।
कर्मचारियों और मीडिया कर्मियों ने श्रम विभाग से न्याय की मांग करते हुए बकाया भुगतान और अवैध तरीके से बंद किए गए अख़बार के मामले में सख़्त कार्रवाई की अपील की है।




