नवरात्रि विशेष : कठेला समय माता के दर पर पूरी होती है हर मनोकामना; नवरात्र में नेपाल से भी दर्शन को पहुँच रहे श्रद्धालु

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‘हाड़ा’ विकास सिंह
सिद्धार्थनगर : सदियों से धार्मिक आस्था का केंद्र रहे कठेला समय माता धार्मिक स्थल पर शारदीय नवरात्र पर्व शुरु होते ही श्रद्धालुओं का ताँता लगना शुरू हो गया है। बढ़नी क्षेत्र के कठेला में विराजमान समय माता का दर्शन करने से भक्तों की खाली झोली भर जाती है। इस मंदिर का निर्माण बहुत ही आकर्षक तरीके से कराया गया है। आदिशक्ति के दर्शन करने के लिए प्रतिवर्ष हजारों की संख्या में भक्त आते हैं। नवरात्रि के दिनों में तो यहां पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु हाजिरी लगाते हैं। समय माता का मंदिर प्राचीन काल से ही आस्था का केंद्र बना हुआ है।

बढ़नी क्षेत्र के तुलसियापुर चौराहे से करीब 10 किलोमीटर दूर बूढ़ी राप्ती नदी के तट पर कठेला में समय माता का प्राचीन मंदिर है। वैसे तो वर्ष भर सोमवार व शुक्रवार को श्रद्धालुओं की भारी भीड़ होती है। लेकिन नवरात्र में तो मेले जैसा माहौल हो जाता है। यहां पर बड़ी संख्या में लोग मन्नत पूरी होने पर कढ़ाई चढ़ाने, मुंडन व अन्य संस्कार कराने के लिए आते हैं। मान्यता है कि समय माता के दरबार में सच्चे मन से आराधना करने वाले श्रद्धालुओं की सभी मनोकामनाएं अवश्य पूर्ण होती हैं।

मंदिर का वर्णन प्रसिद्ध चीनी यात्री फाह्यान की पुस्तक में
मंदिर के व्यवस्था प्रभारी राघवेंद्र मणि त्रिपाठी के अनुसार इस मंदिर का वर्णन प्रसिद्ध चीनी यात्री फाह्यान की पुस्तक में भी मिलता है। मध्यकालीन युग में यहां की रानी पड़ोसी राज्य के हमले से इसी स्थान पर सती हो गयीं थी, कुछ ही दिन बाद वह मूर्ति के रूप में प्रकट हुईं।

समय माता व शंकर जी की मूर्ति स्वयं ही निकली
मंदिर के मुख्य पुजारी हंसूदास के अनुसार सतयुग कालीन इस मंदिर में समय माता की व शंकर जी की मूर्ति किसी ने स्थापित नहीं करवाया है, बल्कि वह स्वयं ही निकली हैं। उनके मुताबिक मंदिर परिसर में समय माता के मुख्य मंदिर के अलावा वनदेवी का मंदिर, शंकर जी का 108 फुट ऊंचा मंदिर भी है। इसके अलावा मंदिर में एक भव्य यज्ञशाला भी है। पुजारी के मुताबिक मंदिर में आये हुए श्रद्धालुओं की सच्चे मन से मांगी गई मनोकामना पूरी होती है। उक्त स्थान को लेहड़ा देवी, देवी पाटन व पल्टा देवी के ही रुप की संज्ञा दी गई है।

मन्नतें पूरी होने पर लोगों के सहयोग से कराया भव्य मंदिर का निर्माण
मंदिर पुजारी हंसूदास का कहना है कि अंग्रेजों के शासन काल से ही यहां मां के भक्तों की आस्था जुड़ी हुई है। स्थान की दिन प्रतिदिन महत्ता बढ़ने से 1994 में कठेला स्थित पूर्वांचल ग्रामीण बैंक के तत्कालीन शाखा प्रबंधक राघवेंद्र मणि त्रिपाठी व बढ़नी नगर पालिका पूर्व चेयरमैन राम नरेश उपाध्याय आदि की मन्नतें पूरी होने पर स्वयं के सहयोग से मंदिर निर्माण कार्य शुरु कराया, जिसमें क्षेत्रीय लोगों के अपार सहयोग से भव्य मंदिर का निर्माण कार्य पूर्ण हुआ। पूरे नौ दिन तक यहां पर श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है।

सबकी मुरादें पूरी करती हैं कठेला समय माता
क्षेत्र के डॉ. विश्वम्भर सिंह, भानु प्रताप सिंह, चंदन सिंह, सुनील श्रीवास्तव, राजेश्वर साह, शिवम उपाध्याय, राकेश पांडेय, अजय पांडेय, उमेश चंद्र मौर्य, नरेंद्रमणि त्रिपाठी, दिनेश मिश्र, डॉ. राज नरायन उपाध्याय, मोहन भारती आदि ने बताया कि हर साल नवरात्र में मां के दरबार में आते है। आज तक जो भी मांगें मांगी सभी मुरादों को समय माता ने पूरा किया है।

Vikas News
Author: Vikas News

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