…तो क्या नेपाल में सैन्य शासन शुरु हो चुका है !; राष्ट्रपति कार्यालय निष्क्रिय तो जंगी अड्डा अति सक्रिय

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‘हाड़ा’ विकास सिंह
नेपाल : नेपाल में Gen-Z आंदोलन के कारण अपदस्थ हुई केपी ओली सरकार के बाद अब तक यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि वास्तव में अभी नेपाल में शासन किसका है। राष्ट्रपति कार्यालय से बुधवार रात्रि 11 बजे तक किसी आधिकारिक विज्ञप्ति के न आने, जंगी अड्डा की अत्यधिक सक्रियता से सैन्य शासन की बू आ रही है। Gen-Z युवाओं के दो दिनों तक चले हिंसक विरोध प्रदर्शनों के बाद सेना ने देश की सुरक्षा संभाल ली है। पूरे देश में कर्फ्यू लगा दिया गया है, सेना सड़कों पर गश्त कर रही है।

नेपाल की राजधानी काठमांडू स्थित जंगी अड्डे में बुधवार को नेपाल सेना ने अंतरिम सरकार के गठन के प्रस्ताव के साथ आंदोलनकारियों और राजनीतिक दलों के साथ बैठक की। Gen-Z के 7,800 सदस्यों ने भी वर्चुअल बैठक की। लगभग पांच घंटे तक चली इस बैठक में नेपाल की संसदीय व्यवस्था में बदलाव और नया संविधान व हिंदू राष्ट्र बनाने का प्रस्ताव पारित हुआ। बैठक में सदस्यों ने कहा कि नेपाल की सांस्कृतिक विरासत हिंदू राष्ट्र से है, इसलिए नए संविधान में यह जरुर होना चाहिए।

Gen-Z आंदोलनकारियों ने संसद भवन में नरसंहार का आरोप लगाते हुए आदेश देने वाले तत्कालीन प्रधानमंत्री, गृह मंत्री को तुरंत गिरफ्तार करने की मांग की। Gen-Z प्रतिनिधियों की बैठक में नेपाल की पूर्व एवं प्रथम महिला न्यायाधीश सुशीला कार्की को अंतरिम प्रधानमंत्री के लिए प्रस्तावित किया गया। दिनभर की बैठकों के बाद सायं से रात्रि 11 बजे तक राष्ट्रपति भवन से कोई आधिकारिक विज्ञप्ति नही आई।

सुशीला कार्की को अंतरिम प्रधानमंत्री बनाने के प्रस्ताव के बाद Gen-Z का एक गुट बालेंद्र शाह को अंतरिम प्रधानमंत्री बनाने की मांग लेकर सेना मुख्यालय पहुंचा, लेकिन जंगी अड्डे से आंदोलनकारियों को सीधा आदेश कि वार्ता के लिए गुरुवार को आइए (भोली आउनु वार्ता को लागि)।

ऐसे में यह स्पष्ट नहीं है कि शासन की डोर कहां केंद्रित है। सवाल उठ रहा है कि इतना सब होने के बावजूद राष्ट्रपति कार्यालय की वांछित सक्रियता क्यों नहीं है, क्या राष्ट्रपति बंधक हैं या देश में सैन्य शासन शुरु हो चुका है। राष्ट्रपति कार्यालय की बजाय जंगी अड्डे की सक्रियता संवैधानिक व्यवस्था पर सवाल खड़ा कर रहे हैं।

Vikas News
Author: Vikas News

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