‘हाड़ा’ विकास सिंह
लुंबिनी (नेपाल) : विश्व में बढ़ती अशांति, हिंसा और अस्थिरता के बीच शांति, अहिंसा और करुणा का संदेश प्रसारित करने के उद्देश्य से लुंबिनी में एक भव्य ‘विश्व शांति धाम’ का निर्माण किया जा रहा है। यह स्थल भगवान बुद्ध की जन्मस्थली होने के कारण पहले से ही वैश्विक आस्था और आध्यात्मिक महत्व का केंद्र है और अब इसे विश्व शांति के एक प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है। इस धाम का मुख्य उद्देश्य मानवता को एक सूत्र में पिरोना और संवाद, शोध तथा ध्यान के माध्यम से विश्व में शांति स्थापित करना है।

परियोजना के अंतर्गत आधुनिक सुविधाओं से युक्त संग्रहालय, विशाल पुस्तकालय, ध्यान केंद्र और कॉन्फ्रेंस हॉल का निर्माण किया जा रहा है, जहाँ दुनिया भर से विद्यार्थी, शोधकर्ता और विद्वान आकर शांति, दर्शन और मानव मूल्यों पर चर्चा व अनुसंधान कर सकेंगे।

इस धाम की वास्तुकला भी विशेष आकर्षण का केंद्र होगी। इसे कमल के फूल, मक्खन के दीपक और स्तूप की प्रेरणा से डिजाइन किया जा रहा है, जो बौद्ध दर्शन के गहरे प्रतीकों को दर्शाते हैं। परिसर में एक भव्य सभागार का निर्माण प्रस्तावित है, जिसमें एक समय में एक हजार से अधिक लोग बैठ सकेंगे।

इसके अतिरिक्त संग्रहालय, पुस्तकालय, शाकाहारी भोजनालय तथा भिक्षुओं के लिए आवासीय व्यवस्था भी विकसित की जा रही है। धाम की सबसे ऊपरी मंजिल पर भगवान बुद्ध की माता माया देवी की एक विशाल और आकर्षक प्रतिमा स्थापित की जाएगी, जो इस स्थल की आध्यात्मिक गरिमा को और बढ़ाएगी। यह स्थान ध्यान, आत्मचिंतन और सांस्कृतिक आदान-प्रदान के लिए एक शांत और प्रेरणादायक वातावरण प्रदान करेगा, जिससे धार्मिक पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा।
इस महत्वाकांक्षी परियोजना में अहम भूमिका निभा रहे प्रसिद्ध तिब्बती बौद्ध गुरु, ध्यान शिक्षक और आध्यात्मिक नेता श्यालपा तेनजिन रिनपोचे ने बताया कि लुंबिनी न केवल भगवान बुद्ध की जन्मस्थली है, बल्कि यह वैश्विक शांति और मानवीय मूल्यों का प्रतीक भी है। उन्होंने कहा कि माता माया देवी को सनातन परंपरा और ‘ओंकार परिवार’ की जननी के रूप में देखा जाता है, और इस शांति केंद्र के माध्यम से पूरे विश्व को एक परिवार मानते हुए एकता और सद्भाव का संदेश दिया जाएगा।

इस अवसर पर रिनपोचे ने अपनी पुस्तक ‘मुक्ति का मार्ग’ का विमोचन भी किया। इससे पूर्व इस पुस्तक का लोकार्पण बिहार के बोधगया में किया जा चुका है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि भारत और नेपाल के बीच स्थित बौद्ध सर्किट को और अधिक विकसित करने के साथ-साथ आध्यात्मिक मूल्यों के प्रसार की आवश्यकता है, जिससे विश्व में स्थायी शांति स्थापित की जा सके।
विश्व शांति धाम का निर्माण न केवल एक धार्मिक या सांस्कृतिक परियोजना है, बल्कि यह मानवता के लिए एक वैश्विक मंच के रूप में उभरने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जहाँ से शांति, करुणा और सह-अस्तित्व का संदेश पूरी दुनिया में प्रसारित होगा।




