‘हाड़ा’ विकास सिंह
सिद्धार्थनगर : सिद्धार्थ विश्वविद्यालय, कपिलवस्तु के 10वें दीक्षांत समारोह में उत्तर प्रदेश की राज्यपाल एवं विश्वविद्यालय की कुलाधिपति श्रीमती आनंदीबेन पटेल मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुईं। उन्होंने समारोह का शुभारंभ मां शारदा के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलन के साथ किया। इस अवसर पर काशी हिंदू विश्वविद्यालय की वनस्पति विज्ञान विभाग की प्रोफेसर मधुलिका अग्रवाल मुख्य अतिथि तथा उच्च शिक्षा राज्यमंत्री रजनी तिवारी विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहीं।

समारोह में कुलपति प्रो. कविता शाह ने अतिथियों का स्वागत किया तथा विश्वविद्यालय की स्मारिका ‘उत्कर्ष’ एवं मासिक पत्रिका ‘कनेक्ट’ का विमोचन कराया। छात्राओं ने वंदे मातरम् एवं विश्वविद्यालय कुलगीत की प्रस्तुति देकर समारोह को सांस्कृतिक गरिमा प्रदान की।

अपने संबोधन में राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने कहा कि सिद्धार्थनगर भगवान गौतम बुद्ध की पावन धरती है, जिसने विश्व को शांति, करुणा और अहिंसा का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि दीक्षांत समारोह केवल उपाधि प्राप्त करने का अवसर नहीं, बल्कि राष्ट्र सेवा के नए अध्याय की शुरुआत है। उन्होंने विद्यार्थियों से शिक्षा का उपयोग केवल रोजगार के लिए नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण, समाज सुधार और विकसित भारत के निर्माण में योगदान देने का आह्वान किया।

राज्यपाल ने जल संरक्षण, पर्यावरण संरक्षण, नवाचार और प्राकृतिक संसाधनों के संतुलित उपयोग पर विशेष बल देते हुए कहा कि वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने में युवाओं की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। उन्होंने इस बात पर प्रसन्नता व्यक्त की कि इस वर्ष छात्राओं ने छात्रों की अपेक्षा अधिक स्वर्ण पदक अर्जित किए हैं।

मुख्य अतिथि प्रो. मधुलिका अग्रवाल ने विद्यार्थियों से अपने ज्ञान और प्रतिभा के माध्यम से सिद्धार्थ विश्वविद्यालय का नाम राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रोशन करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि भगवान बुद्ध की यह धरती विश्व को शांति और मानवता का संदेश देती रही है तथा विश्वविद्यालय भी ज्ञान और शोध के क्षेत्र में नई पहचान स्थापित करेगा।

उच्च शिक्षा राज्यमंत्री रजनी तिवारी ने सभी पदक एवं उपाधि प्राप्त विद्यार्थियों को बधाई देते हुए कहा कि आज का दिन उनके जीवन की नई शुरुआत है। उन्होंने विद्यार्थियों से अपने ज्ञान और संस्कारों के बल पर समाज एवं राष्ट्र की प्रगति में योगदान देने का आह्वान किया तथा कहा कि बेटियां आज हर क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर देश की दिशा और दशा बदल रही हैं।

कुलपति प्रो. कविता शाह ने विश्वविद्यालय की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए बताया कि वर्ष 2015 में स्थापित सिद्धार्थ विश्वविद्यालय के अंतर्गत वर्तमान में 265 महाविद्यालय संबद्ध हैं। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय पारदर्शी परीक्षा प्रणाली, शोध, नवाचार, मिशन शक्ति, पर्यावरण संरक्षण एवं गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के क्षेत्र में लगातार नए आयाम स्थापित कर रहा है।

दीक्षांत समारोह में स्नातक एवं स्नातकोत्तर स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले 37 विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक एवं प्रशस्ति पत्र प्रदान किए गए, जिनमें 28 छात्राएं और 9 छात्र शामिल रहे। इसके अलावा पीएचडी उपाधिधारकों को भी डिग्रियां प्रदान की गईं।

राज्यपाल ने वर्ष 2026 की डिग्रियों एवं अंकपत्रों को डीजी पोर्टल पर ऑनलाइन अपलोड करने की शुरुआत की तथा विश्वविद्यालय परिसर में नवनिर्मित बालगृह ‘किलकारी’ एवं दिव्यांगजन सुविधायुक्त डिजिटाइज्ड लाइब्रेरी का लोकार्पण किया। उन्होंने बेसिक शिक्षा विभाग की चित्रकला, कहानी कथन एवं भाषण प्रतियोगिताओं के विजेताओं को सम्मानित किया तथा 700 आंगनबाड़ी किटों का वितरण भी किया।

इस अवसर पर एचपीवी टीकाकरण अभियान में उत्कृष्ट कार्य करने वाले अधिकारियों को सम्मानित किया गया तथा गोद लिए गए विद्यालयों को पुस्तकें वितरित की गईं। कार्यक्रम के दौरान जल संरक्षण पर छात्राओं ने विशेष प्रस्तुति दी और स्वास्थ्य केंद्र पर एचपीवी टीकाकरण अभियान का शुभारंभ भी कराया गया।

समारोह में सांसद जगदंबिका पाल, विधायक माता प्रसाद पांडेय, श्यामधनी राही, विनय वर्मा, पूर्व विधायक डॉ. सतीश द्विवेदी, जिलाधिकारी शिवशरणप्पा जीएन, पुलिस अधीक्षक डॉ. अभिषेक महाजन, मुख्य विकास अधिकारी बलराम सिंह, कुलसचिव दीनानाथ यादव आदि उपस्थित रहे। अंत में राष्ट्रगान के साथ समारोह का समापन हुआ।
Author: Vikas News
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