‘हाड़ा’ विकास सिंह
सिद्धार्थनगर : भारत-नेपाल सीमा पर आने-जाने वाले नेपाली नागरिक इन दिनों अलग-अलग मानकों के कारण व्यावहारिक दिक्कतों का सामना कर रहे हैं। एयरपोर्ट और ज़मीनी रास्तों (भारत के साथ खुली सीमा) के लिए लागू अलग नियमों ने आम लोगों की परेशानियां बढ़ा दी हैं। खासकर रोज़मर्रा के उपयोग का सामान लेकर आने वाले नागरिकों को सीमा पर सख्ती का सामना करना पड़ रहा है, जिससे उन्हें भेदभाव का एहसास हो रहा है।
सीमावर्ती कपिलवस्तु जिले के क्षेत्र संख्या 3 से नेपाली कांग्रेस के नवनिर्वाचित सांसद अभिषेक प्रताप शाह ने इस मुद्दे पर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि मौजूदा बैगेज नियमों के तहत विदेश से एयरपोर्ट के जरिए लौटने वाले यात्रियों को कई प्रकार की छूट मिलती है, जबकि भारत से दैनिक जरूरतों का सामान जैसे चावल, दाल, कपड़े आदि लाने वाले लोगों को बॉर्डर पर कड़ी जांच और रोक-टोक से गुजरना पड़ता है।
उन्होंने बताया कि इसका सबसे अधिक असर सीमा क्षेत्र में रहने वाले उन लोगों पर पड़ रहा है, जो अपनी रोज़मर्रा की जरूरतों को पूरा करने के लिए सीमित मात्रा में सामान लाते हैं। सांसद शाह के अनुसार, वर्तमान नियम काफी पुराने हैं और विक्रम संवत 2048 के समय के हैं, जब महंगाई बहुत कम थी। आज की बढ़ती कीमतों के दौर में ये नियम अप्रासंगिक हो चुके हैं।
उन्होंने मांग की कि कम से कम 10 हजार रुपये तक के सामान पर कस्टम ड्यूटी में छूट दी जाए, ताकि आम नागरिकों को राहत मिल सके। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य भले ही स्मगलिंग और राजस्व नुकसान को रोकना हो, लेकिन प्रशासन आम नागरिकों और व्यावसायिक तस्करों में अंतर करने में असफल रहा है, जो एक गंभीर प्रशासनिक कमजोरी है। सांसद शाह ने सुझाव दिया कि सरकार एक निश्चित सीमा तक सामान लाने की स्पष्ट अनुमति दे और प्रक्रिया को सरल बनाए।
उन्होंने कहा कि पहचान पत्र दिखाकर या सामान का रजिस्ट्रेशन कराकर सीमित मात्रा में सामान लाने की व्यवस्था की जा सकती है। इससे आम लोगों को राहत मिलेगी और राजस्व प्रणाली भी अधिक पारदर्शी बनेगी।
उन्होंने यह भी कहा कि एयरपोर्ट के जरिए लाए जाने वाले महंगे सामान जैसे सोना, चांदी और मोबाइल फोन की तुलना में सीमा पर लाया जाने वाला घरेलू सामान सस्ता और आवश्यक होता है। ऐसे में बुनियादी जरूरतों के सामान पर सख्ती करना उचित नहीं है।
सांसद अभिषेक प्रताप शाह ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने इस मुद्दे पर जल्द पुनर्विचार नहीं किया, तो वे आम नागरिकों और गरीब वर्ग के हित में कड़े कदम उठाने से पीछे नहीं हटेंगे।





