‘हाड़ा’ विकास सिंह
सिद्धार्थनगर : ढेबरुआ थाना क्षेत्र के बढ़नी कस्बे में स्थित एक निजी अस्पताल में कथित चिकित्सीय लापरवाही के चलते नवजात शिशु की मौत का मामला सामने आने के बाद हड़कंप मच गया। नवजात की मौत से आक्रोशित परिजनों ने अस्पताल परिसर में जमकर हंगामा किया और अस्पताल संचालक सहित संबंधित चिकित्सकीय कर्मियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की। घटना ने क्षेत्र में संचालित निजी अस्पतालों की कार्यप्रणाली और स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

जानकारी के अनुसार, ढेकहरी बुजुर्ग गांव निवासी नीरज कुमार मंगलवार देर रात अपनी गर्भवती पत्नी पूजा देवी को प्रसव पीड़ा होने पर बढ़नी कस्बे के समय माता स्थान स्थित अल हयात हेल्थ केयर एंड फ्रैक्चर क्लीनिक लेकर पहुंचे। परिजनों का आरोप है कि अस्पताल संचालक बिलाल अहमद ने महिला की हालत गंभीर बताते हुए तत्काल ऑपरेशन कराने की सलाह दी तथा ऑपरेशन में करीब 25 हजार रुपये खर्च होने की बात कही। परिजनों ने 10 हजार रुपये अग्रिम जमा कराए, जिसके बाद बुधवार भोर लगभग चार बजे ऑपरेशन किया गया और एक पुत्र का जन्म हुआ।
ऑपरेशन के बाद नहीं मिली समुचित देखभाल का आरोप
परिजनों का कहना है कि ऑपरेशन के बाद प्रसूता और नवजात को अस्पताल की दूसरी मंजिल पर बने एक अत्यधिक गर्म एवं उमस भरे कमरे में रखा गया, जहां पर्याप्त चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध नहीं थीं। उनका आरोप है कि नवजात की नियमित स्वास्थ्य जांच नहीं की गई और न ही किसी चिकित्सक अथवा प्रशिक्षित मेडिकल स्टाफ की निरंतर निगरानी रही। इसी लापरवाही के कारण नवजात की हालत धीरे-धीरे बिगड़ती गई और गुरुवार शाम लगभग सात बजे उसकी मौत हो गई।
मौत के बाद अस्पताल में हंगामा
नवजात की मौत की सूचना मिलते ही परिजनों में कोहराम मच गया। उनका आरोप है कि घटना के समय अस्पताल संचालक बिलाल अहमद अस्पताल में मौजूद नहीं थे। इससे नाराज परिजनों ने अस्पताल परिसर में विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। करीब दो घंटे बाद अस्पताल पहुंचे संचालक बिलाल अहमद तथा उनकी सहयोगी नाजिश उर्फ नाजिया के साथ परिजनों की तीखी बहस हुई। परिजनों का आरोप है कि अस्पताल प्रबंधन अपनी जिम्मेदारी स्वीकार करने के बजाय उन्हें ही घटना के लिए दोषी ठहराने लगा, जिससे विवाद और बढ़ गया।
प्रसूता की बिगड़ी हालत, पुलिस के हस्तक्षेप से हुआ रेफर
परिजनों के अनुसार, नवजात की मौत के बाद भी प्रसूता पूजा देवी की हालत लगातार गंभीर बनी रही, लेकिन अस्पताल प्रशासन समय रहते उन्हें किसी बड़े अस्पताल में रेफर करने के बजाय टालमटोल करता रहा। स्थिति बिगड़ने पर परिजनों ने डायल-112 पुलिस को सूचना दी। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची। बढ़नी चौकी प्रभारी वीरेंद्र यादव के हस्तक्षेप के बाद देर रात प्रसूता को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बढ़नी भेजा गया, जहां चिकित्सक डॉ. प्रदीप कुमार वर्मा ने प्राथमिक उपचार के बाद उनकी गंभीर स्थिति को देखते हुए जिला अस्पताल सिद्धार्थनगर रेफर कर दिया। बाद में जिला अस्पताल में उनका आवश्यक उपचार किया गया।
समय पर इलाज मिलता तो बच सकती थी जान : परिजन
पीड़ित पिता नीरज कुमार का कहना है कि यदि अस्पताल में नवजात की समय-समय पर चिकित्सकीय निगरानी होती, आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जातीं और गंभीर स्थिति को देखते हुए समय रहते उचित उपचार या रेफर किया जाता, तो उनके मासूम बेटे की जान बचाई जा सकती थी।

घटना के संबंध में नीरज कुमार ने ढेबरुआ थाने में लिखित तहरीर देकर अस्पताल प्रबंधन एवं संबंधित जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।

चर्चा है की यह अस्पताल आयुष चिकित्सक के द्वारा संचालित किया जा रहा है। जिसमें चिकित्सीय सुविधाओं का खासा अभाव है। बीटेक 18 मई को इसका उद्घाटन किया गया था।

इस घटना के बाद क्षेत्र में निजी अस्पतालों की कार्यप्रणाली, विशेषज्ञ चिकित्सकों की उपलब्धता, आपातकालीन चिकित्सा व्यवस्था तथा स्वास्थ्य विभाग की निगरानी को लेकर लोगों में गहरी चिंता और नाराजगी देखने को मिल रही है
Author: Vikas News
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