सोशल मीडिया के जरिए युवाओं को जोड़ने और कट्टरपंथी विचारधारा फैलाने का आरोप; नेपाल सीमा से सटे सिद्धार्थनगर में बढ़ी सतर्कता
‘हाड़ा’ विकास सिंह
लखनऊ/सिद्धार्थनगर। उत्तर प्रदेश आतंकवाद निरोधक दस्ता (यूपी एटीएस) ने अल-कायदा इन इंडियन सब-कॉन्टिनेंट (AQIS) से जुड़े कथित मॉड्यूल के खिलाफ कार्रवाई करते हुए सिद्धार्थनगर निवासी करीब 19 वर्षीय युवक मकसूद अली को तमिलनाडु के कोयंबटूर से गिरफ्तार किया है। कार्रवाई के बाद नेपाल सीमा से सटे सिद्धार्थनगर सहित सीमावर्ती क्षेत्रों में सुरक्षा एजेंसियों ने सतर्कता बढ़ा दी है।
अमिताभ यश, ADG लॉ एंड ऑर्डर/STF उत्तर प्रदेश
एटीएस के अनुसार, मामले की जांच में सामने आया कि कुछ लोग सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और व्हाट्सऐप समूहों के माध्यम से युवाओं को कथित तौर पर कट्टरपंथी विचारधारा से जोड़ने तथा उन्हें देशविरोधी गतिविधियों के लिए प्रेरित करने का प्रयास कर रहे थे।
आजमगढ़ से हुई थी पहली गिरफ्तारी
एटीएस के मुताबिक, इस मामले में मुकदमा संख्या 14/2026 दर्ज किया गया है। इसमें भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 152, 61(2) तथा गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA), 1967 की धाराओं 18 और 38 के तहत कार्रवाई की जा रही है।
जांच के दौरान मामले के पहले आरोपी मोहम्मद नबील को 12 सितंबर 2026 को आजमगढ़ से गिरफ्तार किया गया था। उसके बाद पूछताछ और विवेचना में सामने आए तथ्यों के आधार पर एटीएस ने दूसरे आरोपी मकसूद अली की तलाश शुरू की।
मकसूद अली
कोयंबटूर से हुई गिरफ्तारी
एटीएस ने तमिलनाडु एटीएस के सहयोग से मकसूद अली को कोयंबटूर से गिरफ्तार किया। आरोपी मकसूद अली पुत्र अब्दुल कुद्दुस, मूल रूप से ग्राम मधवापुर (सिसहनिया), थाना बांसी, जनपद सिद्धार्थनगर का निवासी बताया गया है। वह वर्तमान में कोयंबटूर के कोडिसिया ग्राउंड क्षेत्र में रह रहा था।
एटीएस का दावा है कि आरोपी कथित रूप से भारत में हिंसक जिहादी गतिविधियों की साजिश से जुड़ा था और पाकिस्तान स्थित हैंडलरों के संपर्क में आने का प्रयास कर रहा था।
ऑनलाइन माध्यमों से तकनीकी जानकारी हासिल करने का दावा
जांच एजेंसी के अनुसार, मकसूद ने ऑनलाइन माध्यमों से पायथन, जावा, कोडिंग और हैकिंग जैसी तकनीकी जानकारियां हासिल की थीं। एटीएस अब इन गतिविधियों के उद्देश्य और कथित नेटवर्क से उसके संबंधों की भी जांच कर रही है।
‘CAPTAIN M NETWORK’ नाम से एप्लिकेशन बनाने का दावा
एटीएस का कहना है कि मकसूद ने ‘CAPTAIN M NETWORK’ नाम से एक सॉफ्टवेयर एप्लिकेशन विकसित किया था। जांच एजेंसी के अनुसार, इसका उद्देश्य समान विचारधारा वाले लोगों को एक मंच पर जोड़ना था।
एटीएस के मुताबिक, आरोपी विभिन्न व्हाट्सऐप समूहों और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के माध्यम से कथित तौर पर कट्टरपंथी विचारधारा के प्रचार-प्रसार में सक्रिय था। जांच एजेंसी का दावा है कि इसी माध्यम से नबील, मकसूद और अन्य संदिग्धों के बीच संपर्क बना हुआ था।
कई ऑनलाइन समूहों से जुड़े होने का आरोप
जांच में एटीएस को ऐसे ऑनलाइन समूहों से आरोपी के जुड़े होने की जानकारी मिलने का दावा किया गया है, जहां कथित रूप से कट्टरपंथी सामग्री साझा की जाती थी। एजेंसी ने यूयू एंट्री गेट, यूनाइटेड उम्माह, गजवा-ए-हिंद, टीम ब्लैक हैट और लश्कर-ए-महंदी जैसे समूहों का उल्लेख किया है।
एटीएस का यह भी दावा है कि आरोपी के डिजिटल माध्यमों से AQIS से संबंधित साहित्य और अन्य आपत्तिजनक सामग्री के आदान-प्रदान के साक्ष्य मिले हैं। इन डिजिटल गतिविधियों और कथित नेटवर्क की वास्तविक प्रकृति की जांच जारी है।
ट्रांजिट रिमांड पर लखनऊ लाया गया
गिरफ्तारी के बाद मकसूद अली को ट्रांजिट रिमांड पर लखनऊ लाया गया है। उसे न्यायालय के समक्ष पेश कर आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है। जांच एजेंसियां मामले में कथित नेटवर्क से जुड़े अन्य संभावित लोगों और डिजिटल संपर्कों की भी पड़ताल कर रही हैं।
नेपाल सीमा पर बढ़ी चौकसी
सिद्धार्थनगर नेपाल की अंतरराष्ट्रीय सीमा से सटा जिला है। ऐसे में जिले के एक युवक की इस मामले में गिरफ्तारी के बाद सुरक्षा और खुफिया एजेंसियों ने सीमावर्ती क्षेत्र में निगरानी बढ़ा दी है।
हालांकि, मामले की विवेचना अभी जारी है और सामने आए आरोपों एवं डिजिटल साक्ष्यों का कानूनी परीक्षण संबंधित जांच और न्यायिक प्रक्रिया के तहत होगा। एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि कथित नेटवर्क का दायरा कितना बड़ा है और इससे जुड़े अन्य लोगों की क्या भूमिका रही है।
Author: Vikas News
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