सात फर्जी एसटी प्रमाण पत्र निरस्त : कहार जाति के निकले दस्तावेज, जांच में खुली वर्षों से मिले लाभ की परतें, पुराने राजस्व अभिलेखों ने खोली पोल, समिति ने कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर प्रमाण पत्र बनवाने की पुष्टि की

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‘हाड़ा’ विकास सिंह
सिद्धार्थनगर : पुराने राजस्व अभिलेखों की पड़ताल ने जिले में अनुसूचित जनजाति (एसटी) प्रमाण पत्रों के एक चर्चित मामले की परतें खोल दीं। उसका बाजार ब्लॉक के ग्राम पंचायत सुगही निवासी एक ही परिवार के सात एसटी प्रमाण पत्र जनपद स्तरीय जाति प्रमाण पत्र सत्यापन समिति ने निरस्त कर दिए हैं। समिति ने अपनी जांच रिपोर्ट में कहा है कि संबंधित परिवार के पुराने और वर्तमान अभिलेखों में जाति कहार दर्ज मिली, जबकि एसटी प्रमाण पत्र के समर्थन में कोई विश्वसनीय साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया जा सका। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि प्रमाण पत्र कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर बनवाए गए।
शिकायत से दोबारा खुली फाइल, हाईकोर्ट तक पहुंचा था मामला
ग्राम पंचायत बरदहा के घुमैठा निवासी शिवम सिंह की शिकायत पर मामला दोबारा खुला। इससे पहले भी संबंधित एसटी प्रमाण पत्र निरस्त किए जा चुके थे, लेकिन प्रभावित पक्ष ने उच्च न्यायालय से स्थगन आदेश प्राप्त कर लिया था। न्यायालय के निर्देशों के क्रम में जिलाधिकारी शिवशरणप्पा जीएन ने अपर जिलाधिकारी, एसडीएम, जिला समाज कल्याण अधिकारी, तहसीलदार तथा सतर्कता प्रकोष्ठ के अधिकारियों की समिति गठित कर पूरे मामले की पुनः जांच कराई।
1333 और 1359 फसली के अभिलेख बने सबसे बड़े साक्ष्य
जांच समिति ने 1333 और 1359 फसली के राजस्व अभिलेख, पुराने रजिस्ट्री दस्तावेज, पूर्वजों के अभिलेख, वर्ष 2020 की बीडीओ एवं तहसीलदार स्तर की जांच रिपोर्ट, स्कूल के ट्रांसफर सर्टिफिकेट, ग्रामीणों के बयान और परिवार के रिश्तेदारों के वर्तमान जाति अभिलेखों का परीक्षण किया।
जांच में नंदलाल, उनके पिता और बाबा के पुराने अभिलेखों में जाति कहार दर्ज मिली। इतना ही नहीं, सगे चाचा और भतीजे भी वर्तमान अभिलेखों में अन्य पिछड़ा वर्ग की कहार जाति से संबंधित पाए गए।
समिति ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट कहा कि एसटी होने के दावे के समर्थन में कोई ऐसा पुराना या प्रामाणिक अभिलेख प्रस्तुत नहीं किया गया, जिससे अनुसूचित जनजाति का दावा सिद्ध हो सके।
इन सात लोगों के एसटी प्रमाण पत्र निरस्त
समिति ने नंदलाल, पत्नी सावित्री, बेटे मनोज कुमार, बेटे स्वर्गीय जितेंद्र कुमार, बहू सुनैना, नाती प्रिंस और नातिन मुस्कान के अनुसूचित जनजाति प्रमाण पत्र निरस्त कर दिए हैं। रिपोर्ट में उपलब्ध अभिलेखों और साक्ष्यों के आधार पर इन प्रमाण पत्रों को नियमविरुद्ध माना गया है।
एसटी कोटे से नौकरी, सम्मान, जनप्रतिनिधित्व और मेडिकल शिक्षा तक का लाभ
समिति की जांच के बाद सामने आए तथ्यों के अनुसार, निरस्त किए गए प्रमाण पत्रों के आधार पर परिवार के विभिन्न सदस्यों ने अलग-अलग क्षेत्रों में लाभ प्राप्त किया। नंदलाल सेवानिवृत्त शिक्षक हैं, जिन्हें एसटी श्रेणी के आधार पर राष्ट्रपति द्वारा राष्ट्रीय शिक्षक सम्मान (नेशनल अवॉर्ड) प्राप्त हुआ था। सावित्री एसटी कोटे से नगर पंचायत उसका बाजार की नामित सभासद हैं। मनोज कुमार और उनकी पत्नी सुनैना वर्तमान में शिक्षक हैं। स्व. जितेंद्र कुमार पुलिस विभाग में सिपाही रहे। नातिन मुस्कान एसटी श्रेणी के आधार पर नीट में चयनित होकर एक प्रतिष्ठित मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस की पढ़ाई कर रही हैं।
जांच के प्रमुख आधार
• 1333 फसली के राजस्व अभिलेख
• 1359 फसली के राजस्व अभिलेख
• पुराने रजिस्ट्री दस्तावेज
• बाबा एवं पिता के राजस्व अभिलेख
• वर्ष 2020 की बीडीओ व तहसीलदार जांच रिपोर्ट
• स्कूल ट्रांसफर सर्टिफिकेट
• ग्रामीणों के बयान
• परिवार के रिश्तेदारों के वर्तमान जाति अभिलेख
Vikas News
Author: Vikas News

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