‘हाड़ा’ विकास सिंह
काठमांडू : नेपाल के रसुवा जिले में आई भीषण फ्लैश फ्लड के दौरान त्रिभुवन त्रिशूली माध्यमिक विद्यालय के 16 सौ से अधिक विद्यार्थियों की जान बचाने में अहम भूमिका निभाने वाले प्रधानाचार्य राजेंद्र दवाड़ी से भारतीय राजदूत नवीन श्रीवास्तव ने मुलाकात की। नुवाकोट के बिदुर में हुई इस मुलाकात के दौरान भारतीय दूतावास के प्रतिनिधि भी मौजूद रहे। बाढ़ की भयावहता को भांपते हुए प्रधानाचार्य दवाड़ी ने समय रहते विद्यालय में कक्षाएं रुकवाकर विद्यार्थियों और शिक्षकों को सुरक्षित स्थान की ओर भेजने का निर्णय लिया। उनकी सूझबूझ और त्वरित कार्रवाई के चलते बड़ी संख्या में बच्चों की जान बचाई जा सकी। इसके कुछ ही समय बाद तेज बाढ़ की चपेट में आकर विद्यालय की इमारत पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई।

महज 14 मिनट में लिया गया बड़ा फैसला
बीते 26 अगस्त की सुबह त्रिशूली घाटी में अचानक हालात बिगड़ने लगे। स्कूल के अकाउंटेंट को रसुवा से फोन पर बाढ़ तेजी से आगे बढ़ने की सूचना मिली। उन्होंने तत्काल प्रधानाचार्य राजेंद्र दवाड़ी को इसकी जानकारी दी। खतरे का अंदाजा लगाते हुए दवाड़ी ने बिना समय गंवाए स्कूल की घंटी बजवाकर कक्षाएं रुकवाईं और विद्यार्थियों को परिसर से बाहर निकालने की प्रक्रिया शुरू कर दी।

बताया गया कि प्रधानाचार्य के पास विद्यार्थियों और स्टाफ को सुरक्षित स्थान तक पहुंचाने के लिए करीब 14 मिनट का ही समय था। उस समय विद्यालय परिसर में 900 से अधिक विद्यार्थी और 16 शिक्षक-कर्मचारी मौजूद थे। स्कूल में कुल करीब 1600 विद्यार्थी अध्ययनरत थे। दवाड़ी ने विद्यालय आने वाली बसों को भी सुरक्षित स्थान की ओर लौटने के निर्देश दिए। कई अभिभावक मोटरसाइकिल से बच्चों को लेने पहुंचे, जबकि कुछ विद्यार्थी बसों और पैदल ऊंचे स्थानों की ओर चले गए। बाढ़ की रफ्तार का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि आखिरी बस के सुरक्षित रूप से पुल पार करने के करीब 14 मिनट बाद पानी की तेज धार बिदुर क्षेत्र तक पहुंच गई। प्रधानाचार्य के अनुसार, बस के नए पुल से गुजरने के बाद पुराना पुल भी ढह गया। कुछ ही देर में विद्यालय परिसर बाढ़ की चपेट में आ गया और बाद में वहां नदी का तल दिखाई देने लगा।

भारत से रहा है विद्यालय का ऐतिहासिक संबंध
त्रिभुवन त्रिशूली माध्यमिक विद्यालय का भारत के साथ लंबे समय से ऐतिहासिक और विकासात्मक संबंध रहा है। विद्यालय की मूल इमारत का निर्माण 1950 के दशक में भारत की प्रारंभिक सहायता से हुआ था।

बताया जाता है कि त्रिशूली जलविद्युत परियोजना से जुड़े एक भारतीय इंजीनियर ने विद्यालय की मूल इमारत का डिजाइन तैयार किया था। विद्यालय के विकास में भारत का सहयोग आगे भी जारी रहा। वर्ष 2022 में भारत सरकार के उच्च प्रभाव सामुदायिक विकास परियोजना (HICDP) के तहत विद्यालय की नई इमारत का निर्माण कराया गया था।

पुनर्निर्माण में सहयोग का आश्वासन
हालिया फ्लैश फ्लड में विद्यालय के पूरी तरह क्षतिग्रस्त होने के बाद भारतीय राजदूत नवीन श्रीवास्तव ने प्रधानाचार्य राजेंद्र दवाड़ी को आश्वस्त किया कि भारत सरकार विद्यालय के पुनर्निर्माण में आवश्यक सहयोग प्रदान करेगी। इस मुलाकात को भारत-नेपाल के बीच जमीनी स्तर पर मानवीय और विकासात्मक सहयोग का महत्वपूर्ण उदाहरण माना जा रहा है। एक ओर आपदा के बीच सैकड़ों बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने वाले प्रधानाचार्य के प्रयासों की सराहना हुई, वहीं दूसरी ओर विद्यालय के पुनर्निर्माण में सहयोग का आश्वासन दोनों देशों की दीर्घकालिक साझेदारी को भी रेखांकित करता है।





