‘हाड़ा’ विकास सिंह
काठमांडू : नेपाली कांग्रेस के पूर्व सभापति एवं पूर्व प्रधानमंत्री शेरबहादुर देउवा ने धर्म के मुद्दे पर अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा है कि वह हिंदू हैं और उन्हें स्वयं को हिंदू कहने का पूरा अधिकार है। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि वह किसी अन्य धर्म के विरोधी नहीं हैं।
रविवार को मिराकल पार्टी वेन्यू में आयोजित नेपाली कांग्रेस के इतरपक्षीय राष्ट्रीय सम्मेलन को संबोधित करते हुए देउवा ने धर्म से जुड़े सवाल का जवाब दिया। उन्होंने कहा कि उनका विवाह और ब्रतबन्ध (उपनयन संस्कार) हिंदू परंपरा के अनुसार हुआ है। वह मंदिर जाते हैं और पशुपतिनाथ की पूजा करते हैं।
देउवा ने अपनी धार्मिक पहचान पर जोर देते हुए कहा, ‘मैं हिंदू हूं, हिंदू हूं, हिंदू हूं।’ साथ ही उन्होंने कहा कि उन्हें स्वयं को हिंदू कहने का अधिकार होना चाहिए और वह दूसरे धर्मों के विरोधी नहीं हैं।
नेपाल की धर्मनिरपेक्ष व्यवस्था पर देउवा ने कहा कि नेपाल धर्मनिरपेक्ष देश बना रहे, यह उनकी इच्छा रही है। हालांकि लोकतंत्र में अंतिम निर्णय जनता का होता है और जनता जो निर्णय करेगी, उसे स्वीकार करना होगा।
धर्म के मुद्दे पर देउवा की टिप्पणी ऐसे समय में आई है, जब नेपाल में हिंदू राष्ट्र की बहाली और धर्मनिरपेक्ष व्यवस्था को लेकर राजनीतिक बहस लगातार चर्चा में है। सम्मेलन की अध्यक्षता कर रहे नेपाली कांग्रेस नेता शशांक कोइराला लंबे समय से नेपाल को हिंदू राष्ट्र बनाए जाने के पक्ष में अपनी राय रखते रहे हैं।
ज्ञानेन्द्र शाह के शासनकाल का भी किया जिक्र
सम्मेलन में देउवा ने पूर्व राजा ज्ञानेन्द्र शाह के शासनकाल से जुड़े प्रसंगों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि उन्होंने कभी लोकतंत्र के पक्ष से समझौता नहीं किया। तत्कालीन राजशाही शासन के दौरान लोकतांत्रिक व्यवस्था के समर्थन और सरकार के आदेशों का पालन नहीं करने के कारण उन्हें जेल भी जाना पड़ा था।
देउवा ने कहा कि उस दौर में भी उन्होंने स्पष्ट कर दिया था कि वह लोकतंत्र के खिलाफ नहीं जा सकते।
क्या बदला है देउवा का राजनीतिक रुख ?
देउवा का यह बयान नेपाल की मौजूदा राजनीतिक बहस के बीच महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उन्होंने एक ओर स्वयं को स्पष्ट रूप से हिंदू बताया, वहीं दूसरी ओर दूसरे धर्मों के प्रति विरोध नहीं होने की बात कही और धर्मनिरपेक्ष व्यवस्था पर अंतिम फैसला जनता पर छोड़ दिया।
ऐसे में देउवा के बयान को नेपाली कांग्रेस के भीतर धर्म और धर्मनिरपेक्षता को लेकर चल रही बहस के संदर्भ में देखा जा रहा है। हालांकि, इसे उनके राजनीतिक रुख में बदलाव का स्पष्ट संकेत माना जाए या व्यक्तिगत धार्मिक पहचान की अभिव्यक्ति – यह आने वाले दिनों में राजनीतिक चर्चा का विषय बन सकता है।
Author: Vikas News
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