‘हाड़ा’ विकास सिंह
सिद्धार्थनगर : ढेबरुआ थाना क्षेत्र के बढ़नी कस्बे में दुर्गा प्रतिमाओं के विसर्जन के दौरान डीजे की तेज आवाज के बीच दो दिन के एक नवजात की मौत का मामला सामने आया है। घटना बढ़नी कस्बे के वार्ड नंबर 9 स्थित रामलीला मैदान की बताई जा रही है। नवजात के परिजनों ने आरोप लगाया है कि विसर्जन के दौरान रामलीला मैदान में डीजे की तेज आवाज और कंपन के बीच बच्चे की तबीयत बिगड़ी और उसकी मौत हो गई। घटना के बाद परिवार में कोहराम मच गया। वहीं, मामले की जानकारी मिलने पर पुलिस और प्रशासन की कार्रवाई को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
18 अक्टूबर को हुआ था बच्चे का जन्म
जानकारी के अनुसार, बढ़नी कस्बे के वार्ड नंबर 9 स्थित रामलीला मैदान निवासी जावेद की पत्नी सबरून्निशा ने 18 अक्टूबर को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी), बढ़नी में एक बेटे को जन्म दिया था। परिजनों के मुताबिक, मंगलवार की देर रात रामलीला मैदान में दुर्गा प्रतिमाओं के विसर्जन के दौरान डीजे की तेज आवाज गूंज रही थी। इसी दौरान नवजात की तबीयत बिगड़ गई।
नवजात की मां सबरून्निशा ने बताया कि रात करीब 11:30 बजे बच्चा एक बार रोया, जिसके बाद उसकी सांसें थम गईं। बच्चे की मौत से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। परिजनों ने घटना की सूचना स्थानीय पुलिस को दी।

रात 2:15 बजे पीड़ित परिवार से मिलने पहुंचे सीओ
घटना की सूचना मिलने के बाद रात करीब 2:15 बजे शोहरतगढ़ के क्षेत्राधिकारी (सीओ) मयंक द्विवेदी भारी पुलिस बल के साथ पीड़ित परिवार से मिलने पहुंचे। उन्होंने परिजनों से घटना के संबंध में जानकारी ली और मामले में कड़ी कार्रवाई का आश्वासन दिया।
परिजनों ने डीजे की तेज आवाज और कंपन को मौत की वजह बताया है। ऐसे में यह देखना अहम होगा कि जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ क्या कार्रवाई की जाती है।
तेज आवाज और ध्वनि प्रदूषण पर उठे सवाल
इस घटना ने धार्मिक आयोजनों और प्रतिमा विसर्जन के दौरान तेज आवाज में डीजे बजाने तथा ध्वनि प्रदूषण के नियमों के पालन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि तेज आवाज के कारण आम जनजीवन प्रभावित होता है, लेकिन निर्धारित ध्वनि मानकों का पालन सुनिश्चित कराने के लिए प्रभावी कदम नहीं उठाए जा रहे हैं।
परिजनों के आरोपों के बाद यह सवाल भी उठ रहा है कि सार्वजनिक आयोजनों में ध्वनि की तीव्रता पर निगरानी रखने और नियमों का उल्लंघन रोकने के लिए प्रशासन ने क्या व्यवस्था की थी।
डीएम और एसएसपी से शिकायत के बावजूद नहीं थमा शोर ?
बढ़नी कस्बे में डीजे की तेज आवाज से परेशान स्थानीय लोगों ने पहले ही ध्वनि प्रदूषण पर रोक लगाने की मांग उठाई थी। लोगों के मुताबिक, उन्होंने बीते 5 अक्टूबर, सोमवार को जिलाधिकारी शिवशरणप्पा जीएन और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. अभिषेक महाजन से मुलाकात कर तेज आवाज में डीजे बजाने पर प्रभावी नियंत्रण लगाने की गुहार लगाई थी।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि इसके बावजूद डीजे की तेज आवाज पर प्रभावी अंकुश नहीं लग सका। अब विसर्जन के दौरान तेज आवाज के बीच नवजात की मौत का मामला सामने आने के बाद प्रशासन की निगरानी और कार्रवाई की प्रभावशीलता पर सवाल उठ रहे हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि धार्मिक आयोजनों के दौरान आस्था और परंपराओं के साथ आम नागरिकों की सुरक्षा, स्वास्थ्य और शांति का भी ध्यान रखा जाना चाहिए। इसके लिए ध्वनि प्रदूषण संबंधी नियमों का सख्ती से पालन कराना जरूरी है।
बड़ा सवाल : शिकायतों के बाद भी प्रभावी कार्रवाई क्यों नहीं ?
जब स्थानीय लोग पहले ही जिलाधिकारी और एसएसपी से तेज आवाज में डीजे बजाने पर रोक लगाने की मांग कर चुके थे, तो ध्वनि प्रदूषण पर प्रभावी नियंत्रण क्यों नहीं हो सका ? क्या संबंधित अधिकारियों ने शिकायतों के बाद मौके पर जांच की थी ? क्या डीजे की तेज आवाज के दौरान निर्धारित ध्वनि मानकों का पालन कराया गया ?
ये ऐसे सवाल हैं, जिनका जवाब जांच और प्रशासनिक कार्रवाई के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा। फिलहाल, नवजात की मौत से जुड़ा मामला संवेदनशील बना हुआ है। परिजनों के आरोपों की निष्पक्ष जांच, मौत के वास्तविक कारणों की पुष्टि और ध्वनि प्रदूषण संबंधी नियमों का प्रभावी अनुपालन सुनिश्चित करना प्रशासन के सामने महत्वपूर्ण चुनौती है।
Author: Vikas News
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