युवा संवाद में बोले संघ के अखिल भारतीय प्रचारक प्रमुख स्वान्त रंजन – युवाओं को देशभक्ति, ज्ञान और व्यायाम से जोड़ना जरूरी

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‘हाड़ा’ विकास सिंह  
सिद्धार्थनगर : राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की ओर से जिला मुख्यालय स्थित लोहिया कला भवन सभागार में युवा संवाद कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय प्रचारक प्रमुख स्वान्त रंजन ने युवाओं से संवाद करते हुए राष्ट्र, समाज और वर्तमान समय की चुनौतियों पर विचार साझा किए। उन्होंने युवाओं से देशभक्ति, ज्ञान, संस्कार और शारीरिक स्वास्थ्य को जीवन का हिस्सा बनाने का आह्वान किया।
स्वान्त रंजन ने कहा कि जो समाज अपने भूतकाल के गौरव को याद रखता है और उससे प्रेरणा लेता है, वह वर्तमान की अव्यवस्थाओं से निराश होकर नहीं रुकता, बल्कि भविष्य के सपने बुनकर राष्ट्र और समाज को उन्नति के रास्ते पर आगे बढ़ाता है। उन्होंने कहा कि तथाकथित अंग्रेज इतिहासकारों ने भारत के इतिहास को लेकर कई गलत धारणाएं प्रस्तुत कीं। भारत में अंग्रेजों के आने से पहले शिक्षा और अर्थव्यवस्था की स्थिति को लेकर भी उन्होंने अपने विचार रखे। उनके अनुसार, 1750 से पहले विश्व अर्थव्यवस्था में भारत की हिस्सेदारी लगभग 25 प्रतिशत थी, जो अंग्रेजी शासन और आर्थिक शोषण के कारण काफी घट गई।

उन्होंने कहा कि भारत के गौरवशाली अतीत और हिंदू समाज के सम्मान को विश्व स्तर पर स्थापित करने के लिए महामना मदन मोहन मालवीय ने काशी हिंदू विश्वविद्यालय की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। चौरीचौरा कांड का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि असहयोग आंदोलन वापस लिए जाने के बाद चौरीचौरा के लोगों को मिली फांसी की सजा के खिलाफ महामना मदन मोहन मालवीय ने पैरवी की और अनेक लोगों को फांसी से बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

युवाओं को सामाजिक चुनौतियों के प्रति जागरूक होने की जरूरत
उन्होंने कहा कि युवाओं और समाज को जागरूक करने के लिए लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक ने गणेश उत्सव को सामाजिक जागरण का माध्यम बनाया। पंडित दीनदयाल उपाध्याय के एकात्म मानव दर्शन का उल्लेख करते हुए उन्होंने युवाओं को राष्ट्र और समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी समझने का आह्वान किया।
युवाओं के सामने मौजूद चुनौतियों पर चर्चा करते हुए उन्होंने घुसपैठ, मतांतरण, नशे और पेपर लीक जैसी समस्याओं का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि स्कूल-कॉलेजों में नशे की बढ़ती समस्या गंभीर चिंता का विषय है। युवाओं को नशे की गिरफ्त में जाने से रोकने के लिए समाज को जागरूक होकर काम करना होगा। व्यवस्था की कमियों को दूर करने और युवाओं के साथ निरंतर संवाद स्थापित करने की आवश्यकता है।
उन्होंने कहा कि हिंदू समाज में जन्मदर के विषय पर भी गंभीरता से विचार करने की आवश्यकता है। हिंदू युवा जन्मदर बढ़ाने के लिए प्रयास करें और सरकार के साथ-साथ समाज को भी इस विषय पर ध्यान देने की जरूरत है।

मोबाइल स्क्रीन से ज्यादा फील्ड में समय देने का आह्वान
तकनीक के उपयोग पर उन्होंने कहा कि तकनीक अपने आप में खराब नहीं होती, बल्कि उसका उपयोग कहां और कैसे किया जाता है, यह महत्वपूर्ण है। युवाओं को मोबाइल और स्क्रीन टाइम कम करके फील्ड में अधिक समय देना चाहिए। उन्होंने युवाओं से एकाग्रता बढ़ाने और अपने लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित करने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि आज के समय में तकनीक जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुकी है, लेकिन इसका संतुलित उपयोग आवश्यक है। युवाओं को अपनी ऊर्जा को सकारात्मक दिशा में लगाते हुए अध्ययन, खेल, व्यायाम, सामाजिक गतिविधियों और राष्ट्र निर्माण के कार्यों से जोड़ना चाहिए।

शिक्षा के साथ संस्कार भी जरूरी
स्वान्त रंजन ने कहा कि विद्या मुक्ति देने के लिए है। भारतीय चिंतन में चार पुरुषार्थ बताए गए हैं और जीवन में उनका संतुलित उपयोग करना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि शिक्षा और संस्कार दोनों जरूरी हैं। संस्कार के बिना शिक्षा अधूरी है। शिक्षा केवल रोजगार प्राप्त करने का माध्यम न बने, बल्कि समाज और राष्ट्र की सेवा का साधन भी बने।
उन्होंने कहा कि युवाओं को ज्ञान अर्जित करने के साथ अपने चरित्र और संस्कारों पर भी ध्यान देना चाहिए। शिक्षा व्यक्ति को सक्षम बनाती है, जबकि संस्कार उसे समाज और राष्ट्र के प्रति जिम्मेदार बनाते हैं।

प्रश्न पूछें, लक्ष्य पर एकाग्र रहें
उन्होंने कहा कि भगवद्गीता में भगवान श्रीकृष्ण ने प्रश्न पूछने और जिज्ञासा रखने का महत्व बताया है। इसलिए युवाओं के साथ छोटे-छोटे स्तर पर निरंतर संवाद होना चाहिए। उन्होंने क्रांतिकारी अशफाक उल्ला खान का उदाहरण देते हुए कहा कि उन्होंने देश की स्वतंत्रता के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया।
उन्होंने कहा कि आज का युवा अपनी रुचि और क्षमता के अनुसार किसी भी क्षेत्र में आगे बढ़े, लेकिन देशभक्ति की भावना को कभी न भूले। युवाओं को झूठ का सहारा नहीं लेना चाहिए। नियमित व्यायाम, ज्ञान अर्जन और लक्ष्य के प्रति एकाग्रता को जीवन का हिस्सा बनाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि युवा ऊर्जा और परिवर्तन का आधार हैं। यह भूमि हमारी मां है और हम उसकी संतान हैं। इसलिए देश और समाज के प्रति कर्तव्यबोध आवश्यक है।

कार्यक्रम का शुभारंभ भारत माता के चित्र पर दीप प्रज्ज्वलित कर एवं समापन राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम् के साथ किया गया। अध्यक्षता डॉ. रत्नाकर पांडेय ने की।
इस अवसर पर प्रांत प्रचारक प्रमुख डॉ. अवधेश, विभाग प्रचारक राजीव नयन, सह विभाग प्रचारक अजीत, सह विभाग कार्यवाह हरिश्चंद्र, जिला प्रचारक राघवेंद्र, जिला प्रचार प्रसार प्रमुख अभय सिंह, रूपेश सिंह, महेश्वर पांडेय, दिवाकर विक्रम सिंह, विकास पांडेय, डॉ. राज नरायन उपाध्याय, नगर प्रचारक सौरभ, जिला कार्यवाह शिवेंद्र, सह जिला कार्यवाह अविनाश, मातृशक्ति प्रमुख सीमा मिश्रा, राष्ट्रीय स्वयंसेविका समिति की विभाग कार्यवाहिका उमा सिंह, नगर कार्यवाह अभय त्रिपाठी, धनञ्जय रस्तोगी, अभिषेक त्रिपाठी, डॉ. मयंक कुशवाहा, शिवा पांडेय, पंकज सिंह, विपुल सिंह, मनीष राय, प्रदीप दुबे, वाचस्पति मिश्र, शशिकांत द्विवेदी, प्रवीण मिश्रा, राम प्रकाश त्रिपाठी, विवेक श्रीवास्तव, सुरेश रैना, अभिषेक पांडेय, रणजीत चौधरी, अमित श्रीवास्तव, सत्यम द्विवेदी, सुरेश गुप्ता, धीरेन्द्र, सत्यम शुक्ला, विश्वजीत पांडेय, सूरज जायसवाल, हरिशंकर सिंह सहित बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।
Vikas News
Author: Vikas News

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